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जकड़ी हुई हैं इनमें मिरी सारी कायनात - Hindi-Urdu Shayari
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Author:  nahiaali [ Fri Jun 25, 2010 10:21 am ]
Post subject:  जकड़ी हुई हैं इनमें मिरी सारी कायनात - Hindi-Urdu Shayari

जकड़ी हुई हैं इनमें मिरी सारी कायनात
गो देखने में नर्म हैं तेरी कलाइयां
- नदीम कासिमी



तुम्हारे नाज किसी और से तो क्या उठते
खता मुआफ ये पापड़ हमीं ने बेले हैं
- अन्जुम फौकी



मेरे महबूब के दामन की वो एक जुम्बिश है
बागवां जिसको गुलिस्तां की हवा कहते हैं
-फलक देहलवी



खुदा जाने करेगा चाक किस-किस के गरीबां को
अदा से उनका चलने में वो दामन का उठा लेना
-जुरअत



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