Urdu & Hindi Stories - Stories.pk
http://www.stories.pk/urdu-hindi/

दुख्तरे-रज ने उठा रक्खी है आफत सर पर - Hindi-Urdu Poetry
http://www.stories.pk/urdu-hindi/hindi-urdu-poetry-t12627.html
Page 1 of 1

Author:  nahiaali [ Fri Jun 25, 2010 10:19 am ]
Post subject:  दुख्तरे-रज ने उठा रक्खी है आफत सर पर - Hindi-Urdu Poetry

दुख्तरे-रज ने उठा रक्खी है आफत सर पर
खैरियत गुजरी कि अंगूर के बेटा न हुआ
- अकबर इलाहाबादी



रिन्दे-खराब-हाल को जाहिद न छेड़ तू
तुझको पराई क्या पड़ी अपनी निबेड़ तू
- जौक



उस शख्स पर शराब का पीना हराम है
जो रहके मैकदे में भी इन्सां न हो सका
- पारसा कौसरी



इतनी पी है कि बाद तौबा भी
बे पिए, बेखुदी सी रहती है
- रियाज खैराबादी


What are your comments about these Hindi-Urdu Poetry?

Page 1 of 1 All times are UTC + 5 hours
Powered by phpBB © 2000, 2002, 2005, 2007 phpBB Group
http://www.phpbb.com/