Urdu & Hindi Stories - Stories.pk
http://www.stories.pk/urdu-hindi/

काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें - Hindi-Urdu Poetry
http://www.stories.pk/urdu-hindi/hindi-urdu-poetry-t12623.html
Page 1 of 1

Author:  nahiaali [ Fri Jun 25, 2010 10:17 am ]
Post subject:  काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें - Hindi-Urdu Poetry

काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें
इक बेवफा को भूल न जायें तो क्या करें
- अख्तर शीरानी



इस से पहले कि बेवफा हो जायें
क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जायें
- अहमद फराज



इस पुरानी बेवफा दुनिया का रोना कब तलक
आइए मिलजुल के इक दुनिया नई पैदा करें
- नजीर बनारसी



हम अक्सर दोस्तों की बेवफाई सह तो लेते हैं
मगर हम जानते हैं दिल हमारे टूट जाते हैं
- रोशन नंदा


What are your comments about these Hindi-Urdu Poetry?

Page 1 of 1 All times are UTC + 5 hours
Powered by phpBB © 2000, 2002, 2005, 2007 phpBB Group
http://www.phpbb.com/