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ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू संवारे - Hindi-Urdu Poet
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Author:  nahiaali [ Fri Jun 25, 2010 10:16 am ]
Post subject:  ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू संवारे - Hindi-Urdu Poet

ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू संवारे
मेरे हाथ से संवरते, तो कुछ और बात होती
- आगा हश्र




कुछ तुम्हारी निगाह काफिर थी
कुछ मुझे भी खराब होना था
- मजाज लखनवी




न जाने क्या है उस की बेबाक आंखों में
वो मुंह छुपा के जाये भी तो बेवफा लगे
- कैसर उल जाफरी



किसी बेवफा की खातिर ये जुनूं फराज कब तलक
जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ
- अहमद फराज


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